नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बीजापुर जिले के करगट्टा की पहाड़ियों में पिछले 15 दिनों से चल रहे नक्सल विरोधी अभियान में जवानों को लगातार सफलता मिल रही है। सेना के जवान अब धीरे-धीरे इस नक्सलवादी क्षेत्र को अपने नियंत्रण में ले रहे हैं।यह पहली बार है जब जवान नक्सलियों के सबसे सुरक्षित ठिकाने माने जाने वाले गलगम, पुजारी कांकेर और करगट्टा की पहाड़ियों तक पहुंचे हैं।
अब जवानों ने नक्सलियों की 3 पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया है। डीआरजी, बस्तर फाइटर और एसटीएफ, कोबरा के जवानों ने खड़ी पहाड़ी पर चढ़कर धीरे-धीरे नीलम सराय, धोबे की पहाड़ी पर कब्जा करने के बाद अब करगट्टा पहाड़ी पर भी कब्जा कर लिया है। सैनिक यहां पहुंचे और उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
जवानों का सर्च ऑपरेशन लगातार जारी
छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के बीच स्थित बीजापुर का करगट्टा और गलगाम इलाका नक्सलियों के लिए सबसे सुरक्षित इलाका माना जाता है। पुलिस अधिकारियों को लगातार इलाके में बड़ी संख्या में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिल रही थी। 15 दिन पहले 5 हजार से ज्यादा जवानों को सर्च ऑपरेशन के लिए इलाके में भेजा गया था। इस बीच पिछले गुरुवार को गलगाम की पहाड़ियों में पुलिस और नक्सलियों के एक समूह के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में जवानों ने तीन महिला माओवादियों को मार गिराया जो पीएलजीए बटालियन नंबर-वन की सदस्य थीं।
नक्सलियों के ठिकाना पर कब्जा
दो दिन पहले मारे गए तीनों नक्सलियों की पहचान कर ली गई है और बताया जा रहा है कि वे नक्सली हैं और उन पर आठ लाख रुपये का इनाम रखा गया है। मुठभेड़ के बाद भी सैनिक आगे बढ़ते रहे। परिणामस्वरूप, पिछले शनिवार को सैनिकों ने सबसे पहले गिलगाम की पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया। इसके बाद रविवार को उसी पहाड़ी पर मौजूद जवानों को एक सुरंगनुमा गुफा मिली जहां जवानों को नक्सलियों की मौजूदगी के सबूत भी मिले। हालांकि जवानों के वहां पहुंचने से पहले ही नक्सली भाग निकले। इस गुफा में 500 से अधिक लोग कई दिनों तक शरण ले सकते हैं।
जवानों ने इस गुफा को भी अपने नियंत्रण में ले लिया, जो कभी नक्सलियों का ठिकाना हुआ करती थी। इसके बाद सैनिक आगे बढ़ते रहे। हालांकि, इस दौरान कई सैनिकों की तबीयत खराब होने लगी, लेकिन यह भी पहला मौका था जब वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर को इस चट्टानी क्षेत्र में उतारा गया और हेलीकॉप्टर की मदद से सैनिकों को सभी संसाधन उपलब्ध कराए गए, ताकि सैनिक सफलतापूर्वक इस क्षेत्र को घेर सकें।
सबसे ऊंची चोटियों पर भी सेना का नियंत्रण
गलगाम की पहाड़ी और गुफा पर कब्जा करने के बाद सैनिक यहां से करीब 25 से 30 किलोमीटर दूर खड़ी पहाड़ी पर चढ़े और नीलम सराय की पहाड़ी पर पहुंच गए। यह पहाड़ी बीजापुर और तेलंगाना की सीमा पर स्थित सबसे ऊंची चोटियों में से एक है। सैनिकों ने इस पर्वत पर भी नियंत्रण कर लिया है। सैनिक यहां से तलाशी अभियान चला रहे हैं। इसके बाद मंगलवार सुबह जवानों ने धोबी की पहाड़ी पर भी कब्जा कर लिया। कहा जा रहा है कि धोबा तेलंगाना और बीजापुर के बीच की सीमा है। धोबी क्षेत्र का अधिकांश भाग तेलंगाना में आता है।
जवानों ने कर्रेगुट्टा पर फहराया तिरंगा
यहां भी जवानों ने पहाड़ों में मैदानी क्षेत्र को देखते हुए लैंडिंग के दौरान हेलीकॉप्टर को पूरी सुरक्षा प्रदान की। बुधवार दोपहर जवानों ने नक्सलियों की पहाड़ी कहे जाने वाले कर्रेगुट्टा को भी अपने नियंत्रण में ले लिया और जवानों ने यहां तिरंगा भी फहराया। अब, अतिरिक्त बलों को लगातार हेलीकॉप्टर से भेजा जा रहा है और वे धीरे-धीरे क्षेत्र पर कब्जा कर रहे हैं तथा अस्थायी शिविर खोल रहे हैं। माना जा रहा है कि नक्सलियों के सबसे सुरक्षित गढ़ माने जाने वाले नीलमसराय, धोबे और करगेट्टा की पहाड़ियां अब जवानों के नियंत्रण में हैं। फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि क्षेत्र में नक्सली मौजूद हैं या नहीं। यह भी कहा जा रहा है कि नक्सली तेलंगाना की ओर बढ़ गए हैं। जिसके कारण गुरुवार से जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ नहीं हुई है, लेकिन अब इस क्षेत्र में जवानों द्वारा कैंप खोलकर धीरे-धीरे ऑपरेशन को आगे बढ़ाया जाएगा।





