नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कर्नाटक के धर्मस्थल को लेकर पूरे देश में हड़कंप मचाने वाला कथित हत्याकांड अब फर्जी निकला है। धर्मस्थल में दर्जनों हत्याएं, दुष्कर्म और गुप्त दफन की सनसनीखेज कहानी गढ़ने वाला मुख्य शिकायतकर्ता सी.एन. चिनैय्या अब खुद पुलिस के शिकंजे में है। एसआईटी (विशेष जांच दल) ने शनिवार को उसे गिरफ्तार कर लिया और अब पूछताछ की जा रही है।
चिनैय्या ने दावा किया था कि उसने 1995 से 2014 तक धर्मस्थल में सफाईकर्मी के रूप में काम किया और इस दौरान उसे महिलाओं और बच्चों के शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया। उसने आरोप लगाया था कि कई मामलों में शवों से यौन शोषण के संकेत भी मिले।
नकाब में था चेहरा, सच्चाई आई सामने
अब तक मीडिया में नकाब पहनकर सामने आने वाला चिनैय्या दरअसल,खुद एक संदिग्ध निकला। एसआईटी को उसकी कहानी और पेश किए गए दस्तावेजों में कई गंभीर विसंगतियां मिलीं, जिसके बाद उसे हिरासत में लेकर अदालत में पेश किया गया। अदालत ने चिनैय्या को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
खुदाई में कुछ मिला, लेकिन कहानी उतनी नहीं
धर्मस्थल के पास नेत्रवती नदी किनारे चिन्हित स्थानों पर एसआईटी ने खुदाई की थी। दो जगहों पर कंकाल के अवशेष भी मिले हैं, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये अवशेष किस काल के हैं और क्या इनका संबंध चिनैय्या के दावों से है या नहीं।
पत्नी और साथी ने किया भंडाफोड़
मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब चिनैय्या की पहली पत्नी सामने आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि, वह मुझे और बच्चों को मारता-पीटता था। यह सब उसने पैसे के लिए किया है,उसके आरोप झूठे हैं।
इसी तरह उसका पूर्व सहकर्मी राजू, जिसने चार साल तक उसके साथ काम किया, उसने बताया कि कभी किसी शव को दफनाने की नौबत नहीं आई। सभी शव पुलिस की अनुमति से एम्बुलेंस द्वारा भेजे जाते थे। राजू ने यह भी कहा कि, चिनैय्या झूठ बोल रहा है, शायद पैसे या किसी साजिश के तहत।
SIT पर टिकी हैं निगाहें
राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर पहले ही विधानसभा में कह चुके हैं कि, यदि आरोप फर्जी पाए जाते हैं तो शिकायतकर्ता पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं इसी के साथ SIT खुद तय करेगी कि आगे खुदाई होनी है या नहीं। इस पूरे मामले ने तीर्थस्थल की छवि को गहरा आघात पहुँचाया है, धर्मस्थल जैसे पवित्र स्थल को लेकर ऐसे सनसनीखेज दावे अगर सच नहीं, तो यह न केवल सामाजिक और धार्मिक सद्भाव के लिए घातक है, बल्कि असली पीड़ितों के लिए भी दुर्भाग्यपूर्ण है। कानून के साथ एक खतरनाक खिलवाड़ भी है। अब सबकी नजरें एसआईटी की जांच और आगे की फोरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं।





