नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। एक्टर अजय देवगन की फिल्म रनवे34 में एक पायलट का किरदार निभानेवाले अजय देवगन किरदार एक मुश्किल फ्लाइट लैंडिंग करता है और इस दौरान वह (मेडे) शब्द का इस्तेमाल करता है। जिसे सुनने के बाद लगता है कि, ये पहली मई से ताल्लुक रखता है। लेकिन ऐसा नही होता जबकि ये शब्द तो पायलट या शिप के कैप्टन आपातकालीन स्थिति में करते हैं। जिसका शब्द फ्रांसीसी अभिव्यक्ति m’aidez या m’aider का अंग्रेजी संस्करण है । जिसका हिंदी में अर्थ मेरी मदद करो जैसा कि हाल ही मेंरविवार को हुए दिल्ली-कोलकाता इंडिगो फ्लाइट के पायलट्स ने कार्गो होल्ड एरिया में किया था। जाने कब किया जाता है Mayday शब्द का इस्तेमाल जो S.O.S से होता है अलग।
बता दें कि, जब प्लेन या शिप किसी खतरे में हो और सभी यात्रियों की जान खतरे में हो तो, इस मुश्किल घड़ी में पायलट या कैप्टन पास कोई दूसरा विकल्प नहीं हो तो वे एयरपोर्ट्स या पोर्ट्स पर मौजूद सेंटर्स में डिस्ट्रेस कॉल करते हैं। जिसके लगते ही सबसे पहले पायलट या कैप्टन तीन बार “मेडे” शब्द दोहराते हैं। ताकि दूसरी तरफ सुन रहे लोग सावधान हो जाएं और इसके बाद दी जाने वाली सभी जानकारी ध्यान से सुनें। ऐसा ही कुछ अभी हाल ही में रविवार को दिल्ली-कोलकाता इंडिगो फ्लाइट के पायलट्स ने कार्गो होल्ड एरिया में धुएं का पता चलने के बाद कोलकाता हवाई अड्डे पर प्राथमिकता लैंडिंग के लिए “मेडे” शब्द का इस्तेमाल किया था।
बता दें कि, साल 1920 में आपातकालीन स्थिति के बारे में जानकारी देने मेडे शब्द की शुरुआत हुई थी। जिसमें सबसे पहले इस सिग्नल का इस्तेमाल लंदन के क्रॉडॉन एयरपोर्ट पर एक वरिष्ठ रेडियो ऑफिसर, फ्रेडरिक स्टैनली मॉकफोर्ड ने किया था। उनसे कोई ऐसा शब्द सुझाने के लिए कहा गया था जो पायलट इमर्जेंसी कॉल के लिए इस्तेमाल करें। तब फ्रेडरिक ने फ्रेंच शब्द “m’aiderका इस्तेमाल कर के मेडे शब्द बनाया। हालांकि, इससे पहले और भी कई शब्द मदद के लिए बदलते रहे। जिनमें S.O.S ज्यादा पुराना नहीं ।
S.O.S से कैसे अलग है Mayday Call
एस.ओ.एस, “सेव अवर सोल्स, का मतलब भी मदद मांगने से है, “मेयडे” से पहले इसी सिग्नल का प्रयोग होता था। लेकिन किसी आपात स्थिति को मौखिक रूप से व्यक्त करने मेडे शब्द एस.ओ.एस. से ज्यादा स्पष्ट रहता है। हालांकि, इन दिनों S.O.S का कम प्रयोग किया जाता है क्योंकि यह मोर्स कोड से ट्रांसमिट होता तीन बिंदुओं के बाद तीन डैश और तीन और बिंदु।
टाइटैनिक के डूबने के बाद एस.ओ.एस. मोर्स कोड के माध्यम से संचार करने वाले जहाजों के वायरलेस ऑपरेटरों के लिए मानक आपातकालीन संकेत बन गया इससे पहले आपातकालीन संकेत सीक्यूडी था। जो सभी स्टेशन संकट एस.ओ.एस. बोले जाने पर समझना मुश्किल हो जाता है । इसलिए वर्बली कम्यूनिकेट करने के लिए “मेयडे” अच्छा विकल्प है। हालांकि, अगर कभी आप खुद को एक रेगिस्तानी द्वीप परहालांकि, अगर कभी आप खुद को एक रेगिस्तानी द्वीप पर या एक बर्फीले जंगल में फंसा हुआ पाए तो खुली जगह पर बड़ा सा S.O.S लिख दें ताकि ऊपर से गुजरने वाला विमान इसे देखकर आपकी मदद के लिए पहुंच सके।





