नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। पुणे में नाबालिग द्वारा तेज रफ्तार कार से दो लोंगो को रौंद कर जान लेने के बाद उत्तर प्रदेश की एक घटना सुर्खियों में आई है। पुलिस ने बुधवार को यूपी के कानपुर के एक डॉक्टर के नाबालिग बेटे को हिट एंड रन केस में हिरासत में लेकर जुवेनाइल होम में भेज दिया है। दरअसल, उसने पिछले कुछ महीनों में दो सड़क हादसों को अंजाम दिया, जिनमें दो लोगों की मौत हो गई और चार गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
अक्टूबर 2023 में दो लोगों को रौंदा
अक्टूबर 2023 में हुए एक हादसे में उसकी कार से टक्कर लगने से दो लोगों की मौत हो गई। तो वहीं, इसी साल मार्च महीने में हुए घटित हुए एक अन्य हादसे में चार लोग घायल हो गए थे। मामले में कानपुर पुलिस ने नाबालिग के पिता के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है। दरअसल, उन्होंने जिन्होंने 26 अक्टूबर के हादसे के बावजूद अपने नाबालिग बेटे को गाड़ी चलाने की अनुमति दे दी थी। हादसे में सागर निषाद और आशीष राम चरण की मौत हो गई थी।
कानपुर पुलिस पर उठे सवाल
कानपुर पुलिस के ऊफर भी सवाल उठने शुरू हो गए। दोनों ही घटनाओं के बाद भी पुलिस ने आरोपी नाबालिग को हिरासत में नहीं लिया है। अधिकारियों ने पुणे एक्सीडेंट केस का हवाला देते हुए कहा कि अक्टूबर वाले मामले की दोबारा जांच होनी चाहिए। पुलिस आयुक्त अखिल कुमार ने जांच पर स्टेटस रिपोर्ट का आदेश दिया है।
नाबालिग के दोस्त के खिलाफ भी होगी कार्रवाई
पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने बताया, अक्टूबर 2023 की घटना में उसकी भूमिका के लिए नाबालिग को जुवेनाइल होम भेज दिया गया है। साथ ही उन्होंने बताया कि हमने छह हफ्ते पहले हुए हालिया बर्रा हादसे, जिसमें चार लोग घायल हुए थे, उसके संबंध में भी कार्रवाई की है। अक्टूबर 2023 महीने में हुई दुर्घटना में, पुलिस ने कहा कि वह नाबालिग के उस दोस्त के खिलाफ भी कार्रवाई करेगी, जिसकी कार वह चला रहा था। अखिल कुमार का कहना है कि दोनों मामलों में नाबालिग के माता-पिता की जिम्मेदारी तय करने के लिए कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श किया जा रहा है।
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