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Friday, March 6, 2026
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Assembly Election Results : राजस्थान में भाजपा को मिली पांच सीट, कांग्रेस को करना पड़ा एक पर संतोष

भाजपा का जहां महाराष्‍ट्र में प्रदर्शन विधानसभा चुनाव में शानदार रहा है, वहीं अन्‍य राज्‍यों में हुए उपचुनावों में उसने कांग्रेस की बुरी पटखनी दी है। राजस्थान में पांच सीटों पर जीत दर्ज की है।

जयपुर / रफ्तार डेस्‍क । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का जहां महाराष्‍ट्र में प्रदर्शन विधानसभा चुनाव में शानदार रहा है, वहीं अन्‍य राज्‍यों में हुए उपचुनावों में भी उसने कांग्रेस को बुरी पटखनी दी है। राजस्थान विधानसभा उपचुनावों में दमदार प्रदर्शन करते हुए सात में से पांच सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है। नतीजों ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया, जिसने सिर्फ एक सीट दौसा जीती, जबकि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने 2008 में अपने गठन के बाद पहली बार अपने पारंपरिक गढ़ खींवसर को खो दिया। वहीं, भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) ने चौरासी में अपनी सीट बरकरार रखी है ।

आपको बतादें कि भारतीय जनता पार्टी ने सिर्फ एक सीट के साथ उपचुनाव में प्रवेश किया था ने खींवसर, सलूंबर, देवली-उनिया, झुंझुनू और रामगढ़ में जीत हासिल की। कांग्रेस, जिसके पास पहले इनमें से चार सीटें थीं, केवल दौसा को बरकरार रखने में सफल रही और चार निर्वाचन क्षेत्रों में तीसरे स्थान पर रही है । भाजपा के इस मजबूत प्रदर्शन का श्रेय प्रभावी प्रबंधन, जोशीले अभियान और राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी के होने के रूप में देखा जा रहा है। 

प्रमुख निर्वाचन क्षेत्र और परिणाम

सलूम्बर-

इस सीट पर भाजपा की शांता मीना ने भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के जितेश कटारा को 1,300 मतों के अंतर से हराया। भाजपा विधायक अमृत लाल की मृत्यु के कारण उपचुनाव की आवश्यकता थी, जिनकी पत्नी शांता ने चुनाव लड़ा और सीट फिर से सुरक्षित की है । इस सीट पर बेहद रोचक मुकाबला देखने को मिला। यहां 21 राउंड तक भारत आदिवासी पार्टी आगे चल रही थी, पर आखिरी राउंड ने सब कुछ पटल दिया और बीजेपी की शांता अमृतलाल मीणा 1,285 वोटों के अंतर से चुनाव जीत गईं। 

झुंझुनू-

भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण जीत झुंझुनू में आई, जो दशकों से ओला परिवार के वर्चस्व वाला कांग्रेस का गढ़ रहा है। भाजपा के राजेंद्र भांबू ने दिग्गज नेता बृजेंद्र ओला के बेटे कांग्रेस के उम्‍मीदवार अमित ओला को 42,848 मतों के निर्णायक अंतर से हराया। यह 21 वर्षों में झुंझुनू में भाजपा की पहली जीत है।

खिंवसर-

एक और उल्लेखनीय जीत में, भाजपा ने खिंवसर पर कब्ज़ा कर लिया, जो 2008 से आरएलपी के वर्चस्व वाली सीट थी। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की हनुमान बेनीवाल की पत्नी कनिका बेनीवाल भाजपा उम्मीदवार रेवंत राम डांगा से 13901 वोटों के अंतर से वोटों से हार गईं। यह हार बेनीवाल परिवार और आरएलपी के लिए एक बड़ा झटका है।

देवली-उनियारा-

देवली-उनियारा में भाजपा के राजेंद्र गुर्जर 41121 वोटों के अंतर से विजयी हुए। मतदान के दौरान एसडीएम को थप्पड़ मारने के लिए सुर्खियों में आए कांग्रेस से हुए बागी नरेश मीना दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस के कस्तूर चंद मीना तीसरे स्थान पर रहे।

रामगढ़-

रामगढ़ में मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन अंत में भाजपा के सुखवंत सिंह के पक्ष में गया, जिन्होंने कांग्रेस के आर्यन जुबैर को हराया। कांग्रेस विधायक जुबैर खान की मृत्यु के बाद यह सीट खाली हुई थी सुखवंत सिंह ने आर्यन जुबैर को यहां 13636 वोटों के अंतर से हराया है। 

दौसा-

कांग्रेस ने दौसा सीट पर कब्जा बरकरार रखा और कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीना के भाई भाजपा के जगमोहन मीना को 2,300 वोटों के अंतर से हराया। भाजपा ने नतीजों पर चिंता जताते हुए पुनर्मतगणना की मांग की है। उल्‍लेखनीय है कि दौसा सीट पर कांग्रेस के दीन दयाल बैरवा के जीतने से सचिन पायलट का कद बढ़ा है। उन्‍होंने यहां पर दो दिनों तक धुआंधार प्रचार किया था।  

चौरासी-

इस सीट पर भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) ने क्षेत्र में अपना गढ़ बरकरार रखते हुए अपनी जीत बरकरार रखी। यहां बीएपी के अनिल कुमार कटारा ने भाजपा के कारिलाल को 24370 वोटों के अंतर से हराया है। यहां पर भी कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहा है। 

इन चुनाव के परिणामों का प्रमुख नेताओं पर इस तरह होगा असर

उपचुनाव के नतीजों ने कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों को झटका दिया है। भाजपा की सफलता से मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के लिए पार्टी में अच्‍छा संदेश गया है, हालांकि, भाजपा के कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीना को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा क्योंकि उनके भाई दौसा में जीत हासिल करने में विफल रहे हैं । दूसरी ओर बात कांग्रेस करें तो उसके लिए, ये नतीजे राज्य में उसकी संभावनाओं के लिए एक झटका मान सकते हैं । झुंझुनू में ओला परिवार की हार और रामगढ़ जैसे गढ़ों को बचाने में पार्टी की असमर्थता प्रमुख क्षेत्रों में पार्टी के घटते प्रभाव को दर्शाती है। इसी प्रकार, हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व वाली आरएलपी को खींवसर में पहली बार हार का सामना करना पड़ा, जिससे पता चल रहा है कि भारत के इस एतिहासिक इमारतों के राज्‍य राजस्‍थान में मतदाताओं की धारणा में महत्वपूर्ण बदलाव आया है ।

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