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Thursday, April 2, 2026
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कौन थे आनंद दिघे, जिनके भतीजे को टिकट देकर उद्धव ठाकरे ने CM शिंदे की मुश्किलें बढ़ा दी हैं!

Maharashtra Vidhan Sabha Chunav दिन पर दिन दिलचस्प होता जा रहा है। ठाणे की कोपरी पंचपखाड़ी सीट पर सीएम एकनाथ शिंदे और उनके राजनीतिक गुरु के रिश्तेदार के बीच तगड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। दो शिवसेना, दो NCP के चलते महाराष्ट्र चुनाव पहले ही जनता के कॉम्प्लेक्स बना हुआ है। अब इसमें थोड़ा और तड़का लगाते हुए उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने सीएम एकनाथ शिंदे और उनकी वाली शिवसेना की मुसीबत बढ़ा दी है। दरअसल, सीएम शिंदे की सीट कोपरी पंचपखाड़ी पर उद्धव ठाकरे ने केदार दिघे को मैदान में उतारा है। वह एकनाथ शिंदे के राजनीतिक गुरु आनंद दिघे के भतीजे हैं। यानी ये मुकाबला शिवसेना बनाम शिवसेना (उद्धव) तो होगा ही, ये देखना भी दिलचस्प होगा कि इस बार सामने राजनीतिक गुरु का परिवार है, ऐसे में चुनाव में एकनाथ शिंदे कितने आक्रामक हो पाते हैं।

कौन थे आनंद दिघे?

आनंद दिघे ने ठाणे क्षेत्र में शिवसेना को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। एकनाथ शिंदे ने लंबे समय तक आनंद दिघे के साथ काम किया, वो उन्हें अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं और राजनीति में अपनी सफलता का श्रेय उन्हें देते हैं। दिघे की पहचान एक जमीनी नेता के तौर पर थी। वो कम उम्र में ही शिवसेना में शामिल हो गए थे। वो ठाणे जिला बीजेपी के अध्यक्ष भी रहे। साल 2001 में एक कार एक्सीडेंट के बाद इलाज के दौरान आनंद दिघे का निधन हो गया था। हालांकि, उनके समर्थक मानते हैं कि उनकी हत्या करवाई गई थी। आनंद दिघे को धर्मवीर के नाम से भी जाना जाता था, साल 2022 में उनके जीवन पर धर्मवीर नाम से एक मराठी फिल्म भी बन चुकी है।

Maharashtra Assembly Polls में क्या-क्या दावे?

राजनीतिक एक्सपर्ट इस विधानसभा चुनाव में कोपरी पंचपखाड़ी सीट के मुकाबले को दोनों शिवसेना के बीच दिघे की विरासत को हासिल करने की जंग के तौर पर देख रहे हैं। केदार दिघे खुद को अपने चाचा की विरासत का वारिस बता रहे हैं, वहीं एकनाथ शिंदे आनंद दिघे को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं। इसके साथ ही इसे शिवसेना (UBT) की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है जिसमें वो शिवसेना के पुराने समर्थकों को अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या रहा है कोपरी पचपखाड़ी सीट का इतिहास

कोपरी पंचपखाड़ी सीट साल 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। अब तक इस सीट पर तीन बार चुनाव हुए हैं, साल 2009, 2014 और 2019 में। तीनों ही चुनाव में एकनाथ शिंदे ने इस सीट पर जीत दर्ज की है। इस सीट को शिवसेना का गढ़ माना जाता है। हालांकि, इस बार चुनाव में शिवसेना दो हिस्सों में बंटी हुई है। ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि कोपरी पंचपखाड़ी की जनता कौन सी शिवसेना को चुनती है।

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