back to top
30.1 C
New Delhi
Thursday, April 2, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

33 साल का संघर्ष, बाबरी विध्वंस से भव्य राम मंदिर निर्माण तक जिसने बदल दिया भारत का परिदृश्य

6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ, जिससे देशभर में सांप्रदायिक दंगे और आतंकवाद की घटनाएँ बढ़ीं और 33 साल लंबी कानूनी-पॉलिटिकल लड़ाई शुरू हुई।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। 6 दिसंबर 1992 का वह दिन भारतीय इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जब उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ। यह घटना केवल एक इमारत का गिरना नहीं थी, बल्कि इसने भारत के राजनीतिक और सामाजिक ढांचे को गहराई से प्रभावित किया, देशभर में सांप्रदायिक दंगे भड़काए और अंततः 33 साल की लंबी कानूनी व राजनीतिक यात्रा के बाद 22 जनवरी 2024 को भव्य राम मंदिर के निर्माण के साथ एक नए युग की शुरुआत की।

 6 दिसंबर 1992: विध्वंस का वो दिन

6 दिसंबर 1992 की सुबह अयोध्या में लाखों कारसेवकों की भीड़ जमा हुई थी, जिसमें बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गज शामिल थे। भीड़ जल्द ही काबू से बाहर हो गई और ‘जय श्री राम’ के नारों के बीच 460 साल पुरानी बाबरी मस्जिद पर हमला शुरू हो गया। पाँच घंटे के भीतर, मस्जिद पूरी तरह से तबाह कर दी गई। बाद में यह माना गया कि उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह द्वारा सुरक्षाकर्मियों को ‘गोली नहीं चलाने’ का आदेश देना भीड़ के अनियंत्रित होने का एक मुख्य कारण था। यह घटना 1990 से चल रहे कारसेवा आंदोलन के चरम पर पहुँचने का परिणाम थी।

देशभर में सांप्रदायिक दंगे और आतंकवाद का उदय

विध्वंस के तुरंत बाद, देशभर में सांप्रदायिक हिंसा फैल गई।मुंबई दंगे (1992-1993): देश की आर्थिक राजधानी मुंबई सबसे ज़्यादा प्रभावित हुई, जहाँ न्यायमूर्ति बीएस श्रीकृष्ण की अध्यक्षता वाली समिति के अनुसार, दंगों में 900 से ज़्यादा लोगों की जान गई और दो हज़ार लोग घायल हुए।

आतंकवाद का नया दौर (1993)- बाबरी विध्वंस के ठीक तीन महीने बाद, 12 मार्च 1993 को मुंबई में 12 अलग-अलग स्थानों पर बम धमाके हुए, जिसमें 257 लोगों की मृत्यु हुई। इन धमाकों के पीछे अंतरराष्ट्रीय अपराधी संगठन डी-कंपनी के मालिक दाऊद इब्राहिम का हाथ था, जिसने इस घटना के बाद विदेश भागकर पाकिस्तान से अपना आतंकी नेटवर्क संचालित किया।

100 हिंदू मंदिरों पर हमला

विध्वंस के दो दिन बाद, 8 दिसंबर 1992 को, पाकिस्तान में भी उन्मादी भीड़ ने लाहौर के प्राचीन जैन मंदिर सहित लगभग 100 हिंदू मंदिरों पर हमला कर उन्हें ध्वस्त कर दिया, जिससे विभाजन के बाद पाकिस्तान में रह रहे हिंदू समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे।

लिब्रहान आयोग और न्यायालय की लंबी यात्रा

विवादित ढाँचे की जाँच के लिए 16 दिसंबर 1992 को रिटायर्ड जज मनमोहन सिंह लिब्रहान की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया गया।इस आयोग को तीन महीने में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन इसका कार्यकाल 48 बार बढ़ाया गया और जाँच 17 सालों तक चली। आयोग ने 30 जून 2009 को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कई राजनेताओं की भूमिका की जाँच की गई, लेकिन किसी को दोषी सिद्ध नहीं किया गया।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (9 नवंबर 2019): इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 के फैसले को चुनौती मिलने पर यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच जजों की पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया कि विवादित ज़मीन हिंदुओं के हिस्से में जाएगी। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में ही 5 एकड़ ज़मीन देने का आदेश दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि मस्जिद तोड़कर मंदिर बनाने के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले, लेकिन मुस्लिम पक्ष भी ज़मीन पर अपना दावा साबित करने में विफल रहा।

 22 जनवरी 2024: विवाद के अंत की शुरुआत

500 सालों की लंबी लड़ाई और विध्वंस के 33 सालों बाद, 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण पूरा हुआ और भगवान राम की बाल स्वरूप मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई। यह ऐतिहासिक क्षण देश-दुनिया के करोड़ों राम भक्तों के लिए दशकों की मनोकामना पूरी होने का प्रतीक बना।

बता दे कि, अयोध्या का भव्य राम मंदिर भारतीय स्थापत्य कला की नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका निर्माण गुलाबी बलुआ पत्थर से किया गया है और इसमें कुल 360 स्तंभ हैं, जिन पर देवी-देवताओं और पौराणिक आकृतियों की अद्भुत नक्काशी की गई है। मंदिर की कुल ऊँचाई 161 फीट है और यह तीन मंजिला संरचना है, जिसमें प्रत्येक मंजिल की ऊँचाई लगभग 20 फीट है।

मंदिर परिसर पांच मंडपों में विभाजित है

मंदिर परिसर पांच मंडपों में विभाजित है। नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप और कीर्तन मंडप जो धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। सबसे निचले तल पर स्थित गर्भगृह में भगवान श्री राम के बाल स्वरूप की मूर्ति स्थापित है। मंदिर को 1,000 साल तक स्थिर रहने के लिए मजबूत राफ्ट फाउंडेशन पर बनाया गया है, और परिसर में सूर्यदेव, देवी भगवती, गणेश, शिव और हनुमान के लिए भी छोटे मंदिर बनाए गए हैं, जो भारतीय आस्था और स्थापत्य कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं।

Advertisementspot_img

Also Read:

बाबरी मस्जिद विवाद पर सियासी तकरार जारी, हुमायूं कबीर ने सुवेंदु अधिकारी को दिया जवाब

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूँ कबीर ने पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता और Suvendu Adhikari पर पलटवार करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष...
spot_img

Latest Stories

Shibpur Seat पर TMC का रहा है दबदबा, 2026 चुनाव में क्या बरकरार रहेगा गढ़?

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजनीति में शिबपुर...

April 2026 Car Launches: कार लवर्स के लिए खुशखबरी, इस महीने लॉन्च होंगी कई दमदार गाड़ियां

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। अप्रैल 2026 ऑटोमोबाइल बाजार के लिए...

आज Hanuman Jayanti पर देखें ये फिल्में इसमें दिखाया गया भगवान का चमत्कार, एक बार जरूर देखें

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आज देशभर में हनुमान जयंती...

Stock Market Today: शेयर बाजार में भारी गिरावट, Sensex 1400 अंक से ज्यादा टूटा, Nifty भी लाल निशान में

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को भारतीय...

CM पद छोड़ने के बाद नीतीश कुमार की सुरक्षा होगी डबल, SSG के साथ मिलेगा Z+ कवर; जानिए और क्या-क्या होंगे बदलाव

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵