नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा ने हिसार की अदालत में डिफॉल्ट बेल की अर्जी दाखिल की है। जहां उनका कहना है कि पुलिस ने उन्हें 90 दिनों से ज्यादा समय तक हिरासत में रखा, लेकिन अब तक पूरी चार्जशीट दाखिल नहीं की गई, जिससे उन्हें कानूनन जमानत का अधिकार बनता है।
क्या है मामला?
ज्योति मल्होत्रा, जो “Travel with Jo” नाम से यूट्यूब चैनल चलाती थीं, उनपर आरोप है कि,उन्होंने पाकिस्तान के एजेंट्स के साथ संवेदनशील जानकारियां साझा कीं। हरियाणा पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने जांच में पाया कि वह पाकिस्तानी उच्चायोग में कार्यरत अधिकारी दानिश अली के संपर्क में थीं। पुलिस ने उनके बीच हुई चैट्स और डिजिटल कम्युनिकेशन के सबूत भी कोर्ट में पेश किए हैं।
गिरफ्तारी से लेकर कोर्ट तक – जानिए अब तक का पूरा घटनाक्रम
तारीख घटना
16 मई 2025 रात 1:35 बजे गिरफ्तारी, पाक एजेंट्स से सांठगांठ का आरोप
14 अगस्त 2025 SIT ने अधूरी चार्जशीट दाखिल की
15 अगस्त 2025 गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे हो गए
29 अगस्त 2025 कोर्ट में अभियोजन ने माना – जांच अब भी अधूरी है
2 सितंबर 2025 अगली सुनवाई की तारीख, फैसला बेहद अहम
डिफॉल्ट बेल: आरोपी का अधिकार या कानून का loophole?
ज्योति की याचिका का आधार है BNSS (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 187(2) अगर गिरफ्तारी के 90 दिन के भीतर पूरी चार्जशीट दाखिल नहीं होती, तो आरोपी को डिफॉल्ट बेल का अधिकार मिल जाता है।ज्योति के वकील का कहना है कि, पुलिस ने चार्जशीट अधूरी दाखिल की और ना ही उसकी कॉपी दी गई। ऐसे में यह न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
कानून क्या कहता है?
भारतीय न्याय संहिता (BNSS) की धारा 187(2) के अनुसार, अगर किसी गंभीर अपराध में पुलिस 90 दिन के भीतर पूरी चार्जशीट दाखिल नहीं करती, तो आरोपी को डिफॉल्ट बेल का हक मिल जाता है। फिर भले ही आरोप कितने भी गंभीर क्यों न हों।
पुलिस का दावा: पाकिस्तान के लिए ‘टूल’ थी ज्योति
SIT के मुताबिक, ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तानी एजेंसियां एक टूलकिट की तरह इस्तेमाल कर रही थीं। वह पाकिस्तान यात्रा के दौरान एजेंट्स के संपर्क में आईं और बाद में भारत लौटने के बाद भी संवाद में बनी रहीं। जांच एजेंसियों ने उनके मोबाइल, लैपटॉप, सोशल मीडिया और बैंकिंग ट्रांजैक्शंस की जांच के बाद गंभीर आरोप लगाए हैं। यदि कोर्ट मानता है कि,चार्जशीट अधूरी है, तो ज्योति को डिफॉल्ट बेल मिल सकती है। लेकिन अगर अभियोजन साबित करता है कि चार्जशीट पूर्ण है, तो बेल की याचिका खारिज हो सकती है। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2025 को होनी है, जो बेहद अहम मानी जा रही है।
SIT के दावे
ज्योति को पाक एजेंसियों ने “टूलकिट” की तरह इस्तेमाल किया।
दानिश अली, पाक उच्चायोग में तैनात अधिकारी से सीधे संपर्क
मोबाइल चैट्स, सोशल मीडिया और विदेशी यात्राओं की जांच में मिले संदिग्ध लिंक
पाकिस्तान यात्रा के दौरान हुई क्लोज मीटिंग्स
केस में जुटाए गए 2500+ पेज के दस्तावेज़, लेकिन चार्जशीट अब भी अधूरी!
सवाल कई, जवाब अब अदालत से
क्या ज्योति मल्होत्रा को कानूनन बेल मिलनी चाहिए, भले ही उन पर देशद्रोह जैसे गंभीर आरोप हों?
क्या SIT की जांच तकनीकी रूप से कमजोर रही।
क्या यह केस न्याय और सुरक्षा एजेंसियों के बीच टकराव का नया उदाहरण बनेगा।
2 सितंबर 2025: सबसे अहम दिन अब इस दिन हिसार कोर्ट तय करेगी कि,ज्योति को डिफॉल्ट बेल मिलेगी या नहीं, ये फैसला देश की सुरक्षा बनाम न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन को दर्शाएगा।





