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Friday, March 6, 2026
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बिहार चुनाव से पहले ललन-अनंत की सियासी जुगलबंदी, पटना में आज होगी साझा रैली, JDU में बढ़ी हलचल

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ी सियासी हलचल देखने को मिल सकती है। जदयू के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह आज बाहुबली नेता अनंत सिंह के साथ मंच साझा करेंगे।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की राजनीति एक बार फिर दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। पटना में आज (30 अगस्त) एक अहम रैली से पहले जदयू के भीतर हलचल तेज हो गई है। इस रैली में केंद्रीय मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह, पूर्व विधायक अनंत सिंह के साथ मंच साझा करेंगे। सुबह दोनों नेता पटना से मोकामा के लिए सड़क मार्ग से रवाना होंगे और वहां जनसंपर्क अभियान चलाएंगे। अब तक सियासत में एक-दूसरे के विरोधी माने जाने वाले इन दोनों नेताओं का साथ आना नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे रहा है। 

JDU में बढ़ता अंतर्विरोध, अनंत सिंह की वापसी से सियासी तापमान चढ़ा

जेल से बाहर आने के बाद मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह ने जदयू की टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है, जिससे पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है। उनके इस बयान पर जदयू नेता नीरज कुमार ने खुलकर नाराजगी जताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। इससे साफ है कि पार्टी में सब कुछ सामान्य नहीं है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पटना में आयोजित हो रहा कार्यक्रम जदयू के भीतर दबे असंतोष को सतह पर ला सकता है। ललन सिंह और अनंत सिंह की साझा मौजूदगी को कई लोग पार्टी नेतृत्व की रणनीति तो कुछ इसे भीतरू टकराव के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। अनंत सिंह की बात करें तो वे मोकामा की राजनीति में लंबे समय से प्रभावी चेहरा रहे हैं। हाल ही में पटना हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया, जिससे सियासी सरगर्मी और तेज हो गई है। ऐसे में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के साथ उनकी सार्वजनिक मंच पर मौजूदगी को पार्टी के भीतर एक बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

अनंत सिंह की दावेदारी से जदयू असमंजस में

बाहुबली नेता अनंत सिंह 5 अगस्त को जेल से रिहा होने के बाद सीधे चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर चुके हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वे मोकामा से दोबारा चुनाव लड़ेंगे। उनके इस इरादे ने जदयू के लिए नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है, क्योंकि पार्टी के भीतर विरोध के स्वर पहले से ही तेज हो चुके हैं। मोकामा की जनता से सीधे संवाद और ललन सिंह जैसे वरिष्ठ नेता का उनके साथ खड़ा होना आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जदयू नेतृत्व अनंत सिंह को टिकट देने का साहस करेगा या पार्टी के अंदरूनी विरोध के आगे यह दावेदारी दम तोड़ देगी।

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नीतीश के करीबी ललन सिंह की अनंत संग सियासी यात्रा, क्या बदलेगा चुनावी गणित?

राजनीति के उतार-चढ़ाव भरे सफर के लिए पहचाने जाने वाले ललन सिंह, जिन्हें राजीव रंजन सिंह के नाम से भी जाना जाता है, एक बार फिर चर्चा में हैं। जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान में केंद्र सरकार में मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री के रूप में कार्यरत ललन सिंह बिहार की राजनीति में एक मजबूत चेहरा रहे हैं। एक दौर था जब ललन सिंह ने नीतीश कुमार के खिलाफ बगावत की थी, लेकिन समय के साथ वे फिर से उनके करीबी माने जाने लगे। 

मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम में ललन सिंह का अनंत सिंह के साथ सड़क यात्रा करना केवल एक साधारण कार्यक्रम नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बदलते समीकरणों का संकेत माना जा रहा है। मुंगेर से सांसद ललन सिंह की यह पहल दर्शाती है कि जदयू में रणनीतिक स्तर पर नए प्रयोग शुरू हो चुके हैं। अनंत सिंह के साथ उनकी यह नजदीकी पार्टी के अंदर और बाहर दोनों स्तरों पर नए सियासी संदेश भेज रही है।

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