नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। इस साल पितृ पक्ष 17 सितंबर से शुरू हो गया है। जोकि 2अक्टूबर 2024 तक चलेंगे। इस दौरान आप अपने पितरों के लिए पिंडदान अथवा श्राद्ध करते हैं।और उनसे अपने घर परिवार की कुशलता की कामना करते हैं। शास्त्रों में ये भी बताया जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान भावनात्मक उपचार और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देती है, जिससे अपने रिश्तों में भी अच्छा असर पहुंचता है।
पितृ पक्ष के दौरान रिश्तों बनाएगा मजबूत
पितृ पक्ष के दौरान लोग अक्सर साथ में मिलक अपने पितरों की पूजा अर्चना श्राद्ध करते हैं। पूजा परिवार के सदस्यों के बीच गलत फहमियों को दूर करके रिश्तों को मजबूत बनाती है। पूजा लोगों को भावनात्मक बोझ से भी मुक्त करती है जिसके बाद उनके मन में करुणा विकसित होती है।इस दौरान आप के पूर्वज धरती पर आते हैं और उनका आपको आशीर्वाद प्राप्त होता है। उनकी कृपा से आपके संबंधों को विकसित करने में मदद मिलती है। क्योंकि उस दौरान आपके घर परिवार से नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है।
पितृ पक्ष में श्राद्ध का महत्त्व
हार साल पितृ पक्ष में व्यक्ति श्राद्ध करता है। इसको लेकर ऐसी मान्यता है कि पितृपक्ष के महीने में श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है। साथ ही अगर आपको पितृ दोष है तो उससे से भी मुक्ति मिलती है। जिसके बाद आपके घर में सुख-समृद्धि आती है। श्राद्ध से जो भी कुछ देने का हम संकल्प लेते हैं, वह सब कुछ उन पूर्वजों को अवश्य प्राप्त होता है और पूर्वज परिवार को खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं।
पूजा विधि
पितृपक्ष के दौरान कई प्रकार की प्रक्रिया की जाती है। इस दिन से लगातार 16 दिन तक आप सुबह जल्दी उठ प्रातः काल उठकर स्नान करें। और अपने पितरों को प्रार्थना करें। इसके बाद श्रद्धा की तैयारी करें। श्राद्ध पितृपक्ष का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। इसमें पितरों के लिए भोजन बनाया जाता है और उन्हें अर्पित किया जाता है। श्राद्ध करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। चलने वाले 16 दिन के पितृ पक्ष पर आप पिंडदान करें पितरों के लिए पिंड बनाएं और उनके नाम से निकाल कर उन्हें समर्पित करें।
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